Delhi
All India Government Nurses Federation के आह्वान पर AMU Nurses Association ने पहले काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया।
एएमयू के नर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन में हिस्सा लिया:
All India Government Nurses Federation के आह्वान पर AMU Nurses Association ने पहले काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया।
नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि वर्षों से लंबित मांगों की अनदेखी न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है, बल्कि इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।
All India Government Nurses Federation के आह्वान पर AMU Nurses Association ने
2 फरवरी से 5 फरवरी तक काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर विरोध दर्ज कराया।
इसके बाद 6 फरवरी को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नर्सिंग कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया।
नर्सिंग कैडर की प्रमुख मांगों में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी को दूर करना,
अत्यधिक कार्यभार और ड्यूटी प्रेशर को कम करना,
पिछले 14 से 15 वर्षों से लंबित डीपीसी और पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना,
पूरी सेवा अवधि के दौरान एक ही पद पर कार्य करने की समस्या का समाधान करना,
और सेवानिवृत्ति के अंतिम समय तक भारी एवं नाइट ड्यूटी के दबाव को समाप्त करना शामिल है।
इसके अलावा नर्सिंग कर्मचारियों की एक बड़ी मांग अस्थायी रूप से कार्यरत नर्सिंग स्टाफ को स्थायी नियुक्ति प्रदान करने से भी जुड़ी हुई है।
एसोसिएशन का कहना है कि वर्षों से सैकड़ों नर्सिंग कर्मचारी बेहद कम वेतन पर अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं मिल पाई है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से है।
नर्सिंग स्टाफ की कमी और अत्यधिक कार्यभार के कारण मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है।
कर्मचारियों पर लगातार ड्यूटी और नाइट शिफ्ट का दबाव रहता है, जिससे न केवल उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक इन समस्याओं की अनदेखी करने से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है।
एसोसिएशन के अनुसार एएमयू में करीब 1300 बेड का मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहा है,
लेकिन वहां केवल लगभग 350 नर्सिंग स्टाफ कार्यरत है,
जो कि निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार बेहद कम संख्या मानी जाती है।
इसके साथ ही कई नर्सिंग कर्मचारी पिछले कई वर्षों से मात्र करीब 19,500 रुपये प्रतिमाह वेतन पर अस्थायी रूप से कार्य कर रहे हैं।
ये कर्मचारी अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष स्वास्थ्य सेवा को समर्पित कर देते हैं, लेकिन स्थायी नियुक्ति के बिना ही उनके सेवानिवृत्त होने की स्थिति बन रही है।
धरना प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगें रखीं और सरकार व संबंधित प्रशासन से शीघ्र समाधान की अपील की।
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया गया, जहां किसी भी तरह की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।
02/09/2026 04:15 PM


















