Aligarh
एएमयू की जमीन के लिए हर कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई में खड़े रहेंगे: इमरान मिंटोई
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की जमीन को लेकर नगर निगम और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के बीच अब छात्र समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से भी आवाज मुखर होने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता इमरान मिंटोई ने एएमयू की जमीन और संस्थान के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और लोकतांत्रिक कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी कार्रवाई से पहले सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
इमरान मिंटोई ने एएमयू की कुलपति नैमा खातून के उस रुख का भी स्वागत किया है, जिसमें विश्वविद्यालय की जमीन और अधिकारों को लेकर मजबूती से अपना पक्ष रखने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि एएमयू केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की पहचान, विरासत और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीदों से जुड़ा हुआ इदारा है। ऐसे में इसकी जमीन और अधिकारों से जुड़े किसी भी मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
इमरान मिंटोई ने कहा कि नगर निगम की ओर से एएमयू की जमीन को लेकर सामने आए विवाद के बीच विश्वविद्यालय के दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों की विधिवत जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी पक्ष के अधिकारों का निर्धारण केवल कानूनी दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले को न्यायालय के समक्ष भी रखा जाएगा और न्याय की लड़ाई कानूनी तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा, “हम इस इदारे को बचाने के लिए अपनी जान भी दे देंगे।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एएमयू के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ते को ही प्राथमिकता दी जाएगी। उनका कहना है कि किसी भी विवाद का समाधान कानून और संविधान के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।
इमरान मिंटोई ने एएमयू की कुलपति नैमा खातून का आभार जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन के संबंध में उनका स्पष्ट और मजबूत पक्ष एएमयू से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि एएमयू के छात्र और पूर्व छात्र विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों पर हमेशा एकजुट होकर खड़े रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी तलबा बिरादरी एएमयू के साथ मजबूती से खड़ी है और आने वाले समय में भी विश्वविद्यालय के हितों के लिए आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना है कि एएमयू की जमीन से जुड़ा मामला केवल जमीन के स्वामित्व का विषय नहीं है, बल्कि यह संस्थान की स्वायत्तता, अधिकारों और ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो एएमयू के अधिकारों के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और अन्य कानूनी प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे तथा इन्हीं के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि एएमयू के लिए आवाज उठाने वालों को किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत, दस्तावेजी प्रमाण और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
इमरान मिंटोई ने कहा कि एएमयू देश की ऐतिहासिक शिक्षण संस्थाओं में शामिल है और इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय से संबंधित किसी भी भूमि या अधिकार विवाद को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ देखा जाना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि एएमयू की जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए वह और उनके साथ खड़े लोग हर शांतिपूर्ण और कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक मंचों पर भी आवाज उठाई जाएगी और न्यायालय का रास्ता भी अपनाया जाएगा।
इमरान मिंटोई ने कहा, “एएमयू हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारी आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद है। इसकी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए हम हर शांतिपूर्ण और कानूनी रास्ता अपनाएंगे।”
उन्होंने कहा कि एएमयू के लिए आवाज पहले भी उठती रही है और आगे भी उठती रहेगी। उन्होंने एएमयू से जुड़े छात्रों, पूर्व छात्रों और समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से संस्थान के हित में एकजुट रहने की अपील की।
उन्होंने अंत में कहा, “एएमयू के लिए आवाज उठती रहेगी और एएमयू के लिए हम हमेशा खड़े रहेंगे।”
इस बयान के बाद एएमयू की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर छात्र समुदाय और सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं। अब निगाहें प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अभिलेखीय जांच और संबंधित पक्षों के अगले कदम पर टिकी हैं।
08/23/2026 12:24 PM


















