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AMU में छात्रों के आंदोलन की बड़ी जीत! 5 नवंबर को होगा छात्रसंघ चुनाव, यासिर फहद की भूख हड़ताल खत्म:
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा आंदोलन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्र नेता यासिर फहद के नेतृत्व में चल रहे धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 5 नवंबर 2026 को छात्रसंघ चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घोषणा के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी का माहौल है। छात्र नेता जानिब हसन ने इसे छात्रों की मेहनत का नतीजा बताते हुए कहा कि आखिरकार छात्रों की आवाज सुनी गई है और उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक कदम उठाया गया है।
छात्रों के मुताबिक, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं। इसी को लेकर छात्र लगातार चुनाव बहाल करने और चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग उठा रहे थे। छात्रों का कहना था कि छात्रसंघ विद्यार्थियों की आवाज को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। छात्रसंघ के जरिए छात्र अपनी समस्याओं, शैक्षणिक सुविधाओं, हॉस्टल, फीस, लाइब्रेरी और विश्वविद्यालय से जुड़े दूसरे मुद्दों को संगठित तरीके से उठा सकते हैं। लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण छात्रों के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठ रहे थे। इसी मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे तेज होता गया और डाक पॉइंट पर छात्रों का धरना लगातार जारी रहा।
इस आंदोलन में छात्र नेता यासिर फहद की भूख हड़ताल सबसे प्रमुख घटनाक्रम बनकर सामने आई। छात्रसंघ चुनाव की घोषणा की मांग को लेकर यासिर फहद लगातार भूख हड़ताल पर बैठे रहे। आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि चुनाव कराने की तारीख घोषित की जाए, चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए और छात्रसंघ चुनाव को लेकर ठोस निर्णय लिया जाए। छात्रों का कहना था कि केवल आश्वासन देने से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि चुनाव की निश्चित तारीख और स्पष्ट कार्यक्रम सामने आना चाहिए।
भूख हड़ताल के दौरान आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार बातचीत की मांग भी उठाई। छात्रों की ओर से लगातार यह सवाल किया जा रहा था कि जब छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो अब तक इस दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर धरना जारी रखा और प्रशासन पर चुनाव की घोषणा करने का दबाव बनाया। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ा, विश्वविद्यालय परिसर में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया।
अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, 5 नवंबर 2026 को एएमयू छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान कराया जाएगा। इस घोषणा को छात्र आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया को लेकर छात्रों की उम्मीदें अब इस बात पर टिकी हैं कि घोषित कार्यक्रम के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं और तय समय पर मतदान कराया जाए। छात्र नेता जानिब हसन ने इसी उम्मीद को जाहिर करते हुए कहा कि छात्रों की मेहनत रंग लाई है। उनके मुताबिक, लंबे समय से छात्र जिस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे, अब उस पर आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।
छात्रों के बीच इस घोषणा के बाद उत्साह देखने को मिला। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव केवल पदाधिकारियों को चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और विश्वविद्यालय की व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर भी देता है। उनका मानना है कि छात्रसंघ के गठन से विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का एक व्यवस्थित माध्यम तैयार हो सकता है। इससे छात्रों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान की मांग करने में मदद मिल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर को लेकर उठी मांग भी महत्वपूर्ण रही। आंदोलनकारी छात्र प्रोफेसर मोहम्मद नवेद खान को चीफ प्रॉक्टर के पद से हटाने की मांग कर रहे थे। छात्रों की मांगों और विरोध के बीच अब प्रोफेसर नवेद खान को हटाए जाने तथा प्रोफेसर नफीस अहमद अंसारी को नया चीफ प्रॉक्टर बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसे भी आंदोलन से जुड़े प्रमुख घटनाक्रमों में गिना जा रहा है। छात्रों के एक वर्ग का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर हुए इस बदलाव से उनकी प्रमुख मांगों में से एक पर कार्रवाई हुई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सामने आए घटनाक्रम के बाद छात्र नेताओं ने आंदोलन के दौरान उठाई गई अन्य मांगों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। आंदोलनकारी छात्रों की ओर से दावा किया गया है कि निलंबित छात्रों के मामलों और दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर भी सहमति बनी है। छात्रों के लिए यह मुद्दा भी बेहद महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि आंदोलन के दौरान कार्रवाई और मुकदमों को लेकर असंतोष सामने आता रहा था। हालांकि, इन मामलों में अंतिम निर्णय, संबंधित आदेश और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि किन छात्रों के निलंबन और किन मुकदमों के संबंध में क्या फैसला लिया गया है।
इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब एएमयू की वाइस चांसलर प्रोफेसर नईमा खातून, पीवीसी प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान, रजिस्ट्रार प्रोफेसर आसिम जफर और नए चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर नफीस अहमद अंसारी धरनास्थल पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने भूख हड़ताल कर रहे छात्र नेता यासिर फहद से मुलाकात की। इस दौरान यासिर फहद को जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराने की पहल की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के धरनास्थल पर पहुंचने और छात्र नेता से मुलाकात के बाद आंदोलनकारी छात्रों के बीच खुशी का माहौल बन गया।
छात्रों के लिए यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि आंदोलन के दौरान वे लगातार विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों से सीधे संवाद करने और अपनी मांगों पर निर्णय लेने की अपील कर रहे थे। वाइस चांसलर, पीवीसी, रजिस्ट्रार और नए चीफ प्रॉक्टर का धरनास्थल पर पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत का एक महत्वपूर्ण चरण सामने आया है। हालांकि, आंदोलनकारियों की सभी मांगों पर किस तरह और किन शर्तों के साथ निर्णय लिया गया है, इसकी पुष्टि संबंधित आधिकारिक आदेशों और लिखित फैसलों से होना जरूरी है।
यासिर फहद को जूस पिलाए जाने के बाद छात्रों ने खुशी जाहिर की। लंबे समय से चल रहे धरने और भूख हड़ताल के बीच यह घटनाक्रम आंदोलनकारी छात्रों के लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। छात्रों का कहना है कि उन्होंने चुनाव की तारीख घोषित कराने के लिए लगातार आवाज उठाई और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखा। अब जब 5 नवंबर को मतदान का कार्यक्रम सामने आया है, तो उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया तय समय पर पूरी होगी और विद्यार्थियों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा।
पूर्व चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर मोहम्मद नवेद खान को हटाए जाने के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने इसे अपनी मांगों से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा। छात्रों ने इस घटनाक्रम के बाद ‘यौमे निजात’ मनाए जाने की बात भी सामने रखी है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उन्होंने प्रॉक्टर कार्यालय से जुड़े मुद्दों को लेकर भी आवाज उठाई थी और अब प्रशासनिक बदलाव के बाद उन्हें उम्मीद है कि विश्वविद्यालय में छात्रों तथा प्रशासन के बीच संवाद की स्थिति बेहतर होगी।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक प्रशासनिक बदलाव तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। छात्रसंघ चुनाव की बहाली, चुनाव कार्यक्रम की स्पष्टता, आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई, निलंबन और मुकदमों की स्थिति जैसे मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण हैं। यदि चुनाव की घोषणा के साथ इन सभी विषयों पर स्पष्ट और आधिकारिक निर्णय सामने आते हैं, तो छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
10/09/2026 10:13 AM


















