UttarPradesh
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को हुक्का बार चलाने की याचिकाएं खारिज कर दीं।
उत्तर प्रदेश में हुक्का बार चलाने वालों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका:
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को हुक्का बार चलाने की याचिकाएं खारिज कर दीं।
कोर्ट ने कहा, यूपी में अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दूसरे सार्वजनिक स्थानों के तय स्मोकिंग जोन में भी ग्राहकों को हुक्का नहीं दिया जा सकेगा।
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अबधेश चौधरी की बेंच ने कहा कि हुक्का बार चलाना और रेस्टोरेंट में हुक्का देना सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के तहत प्रतिबंधित है।
जस्टिस शेखर ने अपने फैसले में एक कविता भी लिखी। प्रदेश के Gen-Z से सिगरेट से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा, पहली सिगरेट को हल्के में न लें। यह पहली गलती आदत बन जाती है। उदाहरण देने के लिए उन्होंने कॉलेज के दिनों के अपने अनुभव भी साझा किए।
जज ने सुनाई अपनी कहानी…
'मैंने कभी सिगरेट न पीने का संकल्प लिया था'
जस्टिस शेखर बी. सराफ ने सुनवाई के दौरान अपने छात्र जीवन के अनुभव को कविता के माध्यम से साझा किया। उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि धूम्रपान की शुरुआत अक्सर मजाक या जिज्ञासा में एक सिगरेट से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत में बदल सकती है।
उन्होंने बताया कि लॉ कॉलेज में पढ़ाई के दिनों में वह धूम्रपान करने वालों का मजाक उड़ाते थे और उन्होंने कभी सिगरेट न पीने का संकल्प लिया था। हालांकि, एक वरिष्ठ के साथ चाय पीते समय मजाक में सिगरेट का एक कश लेने से इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद कभी-कभार की सिगरेट धीरे-धीरे नियमित आदत में बदल गई।
उन्होंने अपने अनुभव में धूम्रपान के कारण होने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया। जज ने कहा कि बाद में इस आदत को छोड़ने के लिए निकोटिन पैच और च्विंगम जैसे उपाय भी किए, लेकिन इसे छोड़ना आसान नहीं रहा।
जस्टिस शेखर बी. सराफ ने अपने अनुभव के माध्यम से युवाओं को संदेश दिया कि धूम्रपान की पहली शुरुआत को मामूली समझना आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जिन रेस्टोरेंट के पास वैध फूड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस हैं, उन्हें तय स्मोकिंग जोन में हुक्का परोसने की अनुमति दी जाए। उन्होंने पुलिस के दखल पर रोक लगाने की भी मांग की थी।
कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना। पीठ ने कहा कि 2017 के नियमों में बदलाव के बाद ‘कोई अन्य सेवा’ की जगह ‘कोई भी सेवा’ शब्द इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, कोयला लगाना, ग्राहक को हुक्का देना और कोयला बदलना जैसी गतिविधियां सेवा मानी जाएंगी।
09/30/2026 02:15 AM


















